- 5 Unforgettable 90s Dance Stories Karisma Kapoor Revealed on India’s Best Dancer Season 5
- ज़रीन खान की स्टाइलिश मौजूदगी में लॉन्च हुआ X ब्लू जींस का विमेंस डेनिम कलेक्शन
- Zareen Khan Makes a Stylish Appearance at X Blue Jeans' Women's Denim Collection Launch
- रोहित आई हॉस्पिटल की चिकित्सा सेवा के 35 गौरवशाली वर्ष पूर्ण
- Dulquer Salmaan-Pooja Hegde to Prabhas-Triptii Dimri: 6 Exciting Fresh Duos to Watch Out For
विश्व अस्थमा दिवस पर डॉ. ए.के. द्विवेदी ने प्रथम वर्ष BHMS विद्यार्थियों को बताया एडवांस्ड होम्योपैथी का महत्व
प्रारंभिक अवस्था में अस्थमा की रोकथाम में सहायक हो सकती है 50 मिलीसिमल पोटेंसी आधारित एडवांस्ड होम्योपैथी
इंदौर। के अवसर पर प्रख्यात होम्योपैथिक चिकित्सक ने प्रथम वर्ष BHMS विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए ब्रोंकियल अस्थमा की बढ़ती समस्या तथा उसके दीर्घकालीन प्रबंधन एवं प्रारंभिक रोकथाम में एडवांस्ड क्लासिकल होम्योपैथी की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि बढ़ता वायु प्रदूषण, बदलती जीवनशैली, धूल-धुआं, एलर्जी, धूम्रपान, मानसिक तनाव तथा पर्यावरणीय कारणों से भारत में अस्थमा के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, विशेष रूप से बच्चों एवं युवाओं में।
उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत संवैधानिक (Constitutional) होम्योपैथिक उपचार एवं विशेष रूप से 50 मिलीसिमल (LM) पोटेंसी आधारित एडवांस्ड क्लासिकल होम्योपैथी के माध्यम से प्रारंभिक अवस्था में अस्थमा की प्रवृत्ति को नियंत्रित करने तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
डॉ. द्विवेदी ने विद्यार्थियों से कहा, “एडवांस्ड क्लासिकल होम्योपैथी केवल लक्षणों को दबाने का कार्य नहीं करती, बल्कि शरीर की आंतरिक प्रतिरोधक क्षमता, एलर्जिक संवेदनशीलता एवं संपूर्ण श्वसन स्वास्थ्य को संतुलित करने का प्रयास करती है।”
उन्होंने बताया कि ब्रोंकियल अस्थमा एक दीर्घकालिक सूजनजन्य श्वसन रोग है, जिसमें रोगी को घरघराहट, सांस फूलना, सीने में जकड़न एवं बार-बार खांसी की समस्या होती है। आधुनिक चिकित्सा में इनहेलर एवं ब्रोंकोडायलेटर्स तत्काल राहत देते हैं, लेकिन अनेक रोगियों में बार-बार समस्या लौट आती है और दवाओं पर निर्भरता बढ़ती जाती है।
डॉ. द्विवेदी के अनुसार क्लासिकल होम्योपैथी अस्थमा को केवल फेफड़ों का रोग न मानकर एक संवैधानिक एवं प्रणालीगत विकार मानती है, जिसमें आनुवंशिक प्रवृत्ति, भावनात्मक तनाव, पर्यावरणीय प्रदूषण, एलर्जी तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता की असंतुलित प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने एडवांस्ड होम्यो हेल्थ सेंटर, इंदौर में किए गए दीर्घकालीन क्लीनिकल अवलोकनों का उल्लेख करते हुए बताया कि अनेक रोगियों में निम्न सुधार देखने को मिले—
- अस्थमा अटैक की आवृत्ति एवं तीव्रता में कमी
- श्वसन क्षमता में सुधार
- नींद की गुणवत्ता में सुधार
- रात्रिकालीन परेशानी में कमी
- रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं स्टैमिना में वृद्धि
- मौसम परिवर्तन सहन करने की क्षमता में सुधार
- कुछ चयनित रोगियों में इनहेलर पर निर्भरता में कमी
डॉ. द्विवेदी ने विद्यार्थियों को 50 मिलीसिमल पोटेंसी प्रणाली की विशेषताओं के बारे में भी बताया और कहा कि यह पद्धति रोगी की संवेदनशीलता एवं प्रतिक्रिया के अनुसार दवाओं का कोमल एवं क्रमिक उपयोग करने में सहायक होती है।
उन्होंने युवा BHMS विद्यार्थियों को संवैधानिक प्रिस्क्राइबिंग, सूक्ष्म क्लीनिकल ऑब्जर्वेशन एवं नैतिक चिकित्सकीय अभ्यास पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने अस्थमा एवं अन्य दीर्घकालिक श्वसन रोगों में होम्योपैथी की भूमिका को वैज्ञानिक रूप से स्थापित करने हेतु व्यापक शोध एवं मल्टीसेंटर क्लीनिकल स्टडी की आवश्यकता पर बल दिया।
“प्रदूषण नियंत्रण, संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली, श्वसन स्वच्छता एवं प्रारंभिक जागरूकता ही अस्थमा जैसी बढ़ती समस्याओं को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं,” उन्होंने कहा।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने संवैधानिक उपचार पद्धति एवं आधुनिक समय में श्वसन रोगों की चुनौतियों को लेकर डॉ. द्विवेदी से विस्तृत चर्चा की।
डॉ. ए.के. द्विवेदी परिचय
इंदौर के वरिष्ठतम होम्योपैथिक चिकित्सकों में से एक हैं तथा एडवांस्ड होम्यो हेल्थ सेंटर, इंदौर के मुख्य होम्योपैथिक सलाहकार हैं। वे लंबे समय से क्लीनिकल प्रैक्टिस, जनजागरूकता अभियानों, एनीमिया जागरूकता गतिविधियों एवं होम्योपैथिक शोध कार्यों से जुड़े हुए हैं।


